ग्रामीण भारत में भूमि विवादों को सुलझाने और संपत्ति मालिकों को अधिकारिक दस्तावेज देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। पंचायती राज मंत्रालय ने स्वामित्व योजना (SVAMITVA) के तहत 67,000 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण भूमि का सर्वे पूरा कर लिया है। यह सर्वे ड्रोन तकनीक से किया गया, जो पांच सेंटीमीटर तक की सटीकता प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री करेंगे संपत्ति कार्ड वितरित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जनवरी को 10 राज्यों के 65 लाख भूमि मालिकों को संपत्ति कार्ड वितरित करेंगे। इस योजना के तहत अब तक 3.17 लाख गांवों का ड्रोन सर्वे किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 92% है। सरकार ने 2026 तक 3.44 लाख गांवों को कवर करने का लक्ष्य रखा है।
भूमि विवादों का होगा समाधान
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों को सुलझाने में सहायक होगी। संपत्ति कार्ड मिलने से भूमि मालिकों को उनकी जमीन का आधिकारिक दस्तावेज मिलेगा, जिससे वे संपत्ति का मुद्रीकरण (monetisation) कर सकेंगे और बैंकों से ऋण ले सकेंगे।
₹132 लाख करोड़ की भूमि का सर्वे पूरा
अब तक सर्वे के जरिए ₹132 लाख करोड़ की ग्रामीण भूमि की मैपिंग की गई है। ड्रोन तकनीक से तैयार किए गए नक्शे गांवों की सटीक स्थिति को दिखाते हैं, जो न केवल प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाएंगे बल्कि जमीन के सही मालिक की पहचान सुनिश्चित करेंगे।
ड्रोन तकनीक: एक क्रांतिकारी कदम
ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल ने इस योजना को एक नई दिशा दी है। यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि की माप और रिकॉर्डिंग में पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तेज और सटीक है। इससे स्थानीय स्तर पर सरकार और जनता के बीच विश्वास भी बढ़ा है।
2026 तक होगा पूरा लक्ष्य
सरकार ने इस योजना के तहत सभी गांवों को कवर करने का लक्ष्य 2026 तक निर्धारित किया है। यह योजना न केवल भूमि विवादों को समाप्त करने में मदद करेगी, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए नए अवसर भी प्रदान करेगी।
ग्रामीण भारत में बदलाव की दिशा में कदम
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधार का प्रतीक है। संपत्ति कार्ड वितरण के साथ यह योजना लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का वादा करती है।
