
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में जीत के बाद तमिलनाडु सरकार ने किया सम्मानित, 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भेंट
चेन्नई, 8 जून। नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में शानदार जीत दर्ज कर भारत का नाम रोशन करने वाले ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा का सोमवार को तमिलनाडु सचिवालय में विशेष सम्मान किया गया। इस अवसर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन्हें 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक सौंपा और उनकी उपलब्धि की सराहना की।
सम्मान समारोह के दौरान एक दिलचस्प और यादगार घटना भी देखने को मिली। सचिवालय पहुंचे प्रज्ञानानंदा को उस समय आश्चर्य हुआ जब मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों को शतरंज की बिसात लाने का निर्देश दिया और उनके साथ शतरंज खेलने बैठ गए। कुछ देर तक दोनों के बीच शतरंज की रोचक बाजी चली, जिसे वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी उत्सुकता से देखा।
बाद में प्रज्ञानानंदा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने इस तरह के अनुभव की बिल्कुल कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अचानक शतरंज बोर्ड मंगवाया और खेल शुरू कर दिया। प्रज्ञानानंदा ने बताया कि उन्हें पहले यह नहीं मालूम था कि मुख्यमंत्री विजय भी शतरंज खेलने में रुचि रखते हैं।
युवा ग्रैंडमास्टर ने कहा कि मुकाबले में जीत उनकी हुई, लेकिन मुख्यमंत्री ने काफी अच्छा खेल दिखाया। उन्होंने बताया कि खेल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपने मित्रों के साथ अक्सर शतरंज खेलते रहते हैं और इस खेल में उनकी विशेष दिलचस्पी है।
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा की सफलता को भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हाल के वर्षों में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत को कई महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं। उनकी उपलब्धियों ने देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया है।
मुख्यमंत्री विजय ने प्रज्ञानानंदा की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक मंच पर तमिलनाडु और भारत का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रज्ञानानंदा की सफलता से राज्य और देश के अन्य युवा खिलाड़ी भी खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे।
तमिलनाडु सरकार द्वारा किया गया यह सम्मान राज्य के खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समारोह के दौरान प्रज्ञानानंदा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह का सम्मान खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाता है और उन्हें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।
