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ईरान-इजरायल तनाव फिर चरम पर, मिसाइल हमलों से पश्चिम एशिया में बढ़ी जंग की आशंका

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लेबनान पर इजरायली कार्रवाई से भड़का तेहरान, भारतीय दूतावास ने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी 

तेहरान/यरुशलम, 8 जून 2026। पश्चिम एशिया में दो महीने पहले लागू हुए युद्धविराम के बावजूद ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव तेज हो गया है। सोमवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, जिससे पूरे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका गहरा गई है। इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है और लाल सागर में जहाजरानी को बाधित करने की चेतावनी दी है।

इजरायली अधिकारियों के अनुसार सोमवार को ईरान की ओर से तीन चरणों में मिसाइल हमले किए गए। कई मिसाइलों को रोकने के लिए इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय रही। मध्य इजरायल के विभिन्न इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल पैदा हो गया। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और बचाव अभियान तेज कर दिया।

दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसकी कार्रवाई इजरायल द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों का जवाब है। सोमवार तड़के इजरायली सेना ने मध्य और पश्चिमी ईरान के कई क्षेत्रों में हवाई हमले किए थे। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई तेहरान की ओर से हुए पूर्व मिसाइल हमलों के जवाब में की गई। अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे गंभीर सैन्य टकराव माना जा रहा है।

तनाव की एक बड़ी वजह रविवार को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमले भी हैं। इन हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और चेतावनी दी कि यदि लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसका जवाब और अधिक कठोर होगा। तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों पर होने वाले हमलों को नजरअंदाज नहीं करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। हूती समूह ने दावा किया है कि उसने इजरायल की ओर मिसाइल दागी है। साथ ही संगठन ने लाल सागर में समुद्री यातायात को प्रभावित करने की धमकी दी है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है, क्योंकि लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

अमेरिका भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा था कि उन्हें आगे और सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए। हालांकि इसके बावजूद इजरायल ने अपने हमले जारी रखे। इससे वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच रणनीतिक दृष्टिकोण को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक बताई जा रही है। क्षेत्रीय हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को एडवाइजरी जारी करते हुए भारतीय नागरिकों से फिलहाल ईरान की यात्रा न करने की अपील की है। दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीयों को उपलब्ध परिवहन साधनों के जरिए जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है। दूतावास ने कहा है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल रही है और नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान, इजरायल और क्षेत्रीय समूहों के बीच बढ़ते टकराव को जल्द कूटनीतिक माध्यमों से नहीं रोका गया, तो पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े युद्ध की ओर बढ़ सकता है। इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

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