हमदर्द नगर, जमालपुर (अलीगढ़): ईद सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह जज़्बात, मोहब्बत और आपसी भाईचारे की अलामत है। इसी पैग़ाम को आगे बढ़ाते हुए डॉ. आबिद (निवासी: हमदर्द नगर, जमालपुर, अलीगढ़) ने इस खास मौके पर न सिर्फ ईद की मुबारकबाद दी, बल्कि इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत पैग़ाम भी दिया।
डॉ. आबिद सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक ऐसा चिराग़ हैं जो हर जरूरतमंद के लिए उम्मीद की रौशनी बनते हैं। उन्होंने न जाने कितने गरीब और बेसहारा लोगों का मुफ्त इलाज किया, कितनों को दवाइयाँ दीं और बेबस इंसानों के दर्द का मरहम बने। उनकी क्लिनिक में कोई भी मजबूर शख्स जब इलाज के लिए आता है, तो पैसे की तंगी उसकी बीमारी के आगे दीवार नहीं बनती। उनका यह जज़्बा ही उन्हें लोगों के दिलों में बसा देता है।
ईद के इस मौके पर भी उन्होंने अपनी इंसानियत की इस परंपरा को निभाते हुए कई जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज और दवाइयाँ मुहैया कराईं, ताकि उनकी ईद सिर्फ खुशी का नाम न रह जाए, बल्कि सेहतमंद मुस्कान की भी मिसाल बने।
डॉ. आबिद ने कहा, “ईद सिर्फ अपनी खुशी में मसरूफ़ होने का नाम नहीं, बल्कि उन लोगों तक मोहब्बत और राहत पहुँचाने का नाम है, जिनके पास खुशियाँ कम और तकलीफें ज़्यादा हैं। जब कोई बेसहारा हमारी वजह से राहत महसूस करे, तब समझो कि ईद मुकम्मल हुई।”
उन्होंने जरूरतमंदों को ईद की सौगातें बांटी, मासूम बच्चों को मिठाइयाँ खिलाईं और बुज़ुर्गों के हालचाल पूछकर उनके दिलों को सुकून दिया। इस बार हमदर्द नगर की गलियों में ईद की रौनक़ के साथ-साथ इंसानियत की महक भी बिखरी हुई थी।
जहाँ कभी मायूसी थी, वहाँ आज खुशी की रोशनी थी। ये रोशनी सिर्फ चिरागों से नहीं, बल्कि मोहब्बत के उस उजाले से थी, जो हमेशा इंसानियत को रोशन रखती है।
डॉ. आबिद की इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ईद का असल मकसद सिर्फ नए कपड़े पहनना और दावतों का लुत्फ उठाना नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए खुशी और राहत का जरिया बनना है, जिनकी ईद अब तक महज़ एक ख्वाब थी।
