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INDIA गठबंधन ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा

Kharge
विपक्ष एकजुट: शिक्षा मंत्री को हटाने और लोकतंत्र बचाने पर जोर

विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन ने सोमवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर साझा रुख अपनाया। बैठक में शामिल नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई।

बैठक में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद रहे। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि INDIA गठबंधन के सभी दलों ने सर्वसम्मति से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजने का निर्णय भी लिया।

खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और इस मुद्दे पर न्यायपालिका का ध्यान आकर्षित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गठबंधन लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखेगा।

बैठक में देश की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार से आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना था कि मौजूदा आर्थिक हालात पर सभी राजनीतिक दलों को साथ बैठकर विचार करना चाहिए।

INDIA गठबंधन के नेताओं ने आगे भी आपसी एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गठबंधन की बैठकें हर दो महीने में आयोजित की जाएंगी, जबकि संसद सत्र के दौरान विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिदिन रणनीतिक बैठकें जारी रहेंगी।

राजनीतिक हलकों में इस बैठक को विपक्षी एकता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हाल के दिनों में गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के बीच मतभेदों की चर्चाओं के बीच आयोजित यह बैठक विपक्ष की साझा रणनीति और एकजुटता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

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