
बुशरा बानो ने UPSC की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को अपने सफर के बारे में बताने के लिए एक वीडियो बनाया था। इस वीडियो में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी यानी RCA से मिली मदद का भी जिक्र किया। वीडियो की शुरुआत उन्होंने “अस्सलामुअलैकुम” कहकर की और बातचीत के दौरान “इंशाअल्लाह” जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया।
इसके बाद एक संगठन, हिंदू लीगल फंड, ने उनके वीडियो को लेकर शिकायत की। रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत में सवाल उठाया गया कि एक सरकारी अधिकारी ने “जय हिंद” या “वंदे मातरम” जैसे अभिवादन की जगह धार्मिक अभिवादन का इस्तेमाल क्यों किया।
इसी विवाद के बीच बुशरा बानो का खड़गपुर की एडिशनल एसपी की जिम्मेदारी से तबादला कर उन्हें स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट बनाया गया। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से तबादले की आधिकारिक वजह “जनहित” बताई गई है और एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे नियमित तबादला बताया है। इसलिए यह कहना कि सिर्फ “अस्सलामुअलैकुम” कहने की वजह से ही तबादला हुआ, आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं है।
लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
अगर कोई व्यक्ति किसी से “नमस्ते” कहता है, कोई “राम-राम” कहता है, कोई “सत श्री अकाल” कहता है और कोई “अस्सलामुअलैकुम” कहता है, तो क्या सिर्फ अभिवादन के तरीके से उसकी देशभक्ति तय की जानी चाहिए?
बुशरा बानो ने सऊदी अरब में अपनी नौकरी छोड़कर UPSC की राह चुनी और IPS सेवा में आईं। उनकी मेहनत और उनकी पेशेवर यात्रा अपने आप में चर्चा का विषय है।
इस पूरे विवाद में सबसे जरूरी बात यही है कि शिकायत, सोशल मीडिया पर चल रहे दावे और सरकार की आधिकारिक वजह—इन तीनों को अलग-अलग समझा जाए।
और सवाल आपसे भी है—
क्या किसी सरकारी अधिकारी के अभिवादन के तरीके को इतना बड़ा विवाद बना देना चाहिए?
