
जानकारी के अनुसार, शिवचरण अपने जीवन के अंतिम समय में परिवार से मिलने और उनकी आवाज सुनने की इच्छा रखते थे, लेकिन यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उनके निधन के बाद संबंधित संस्था और चिकित्सकीय टीम की मदद से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
वृद्धाश्रम के संचालकों ने बताया कि शिवचरण सरल और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके निधन से आश्रम में शोक का माहौल है। वहीं, नेत्रदान के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि मिल सकती है। इसलिए अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए आगे आना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सके।
