
बुशरा बानो की प्रोफेशनल जर्नी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने विदेश में अच्छी नौकरी और स्थापित करियर के बावजूद सिविल सेवा में जाने का फैसला किया। वह सऊदी अरब की एक यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया।

बुशरा बानो के इस फैसले में उनके पति ने भी उनका साथ दिया। वर्ष 2016 में दोनों सऊदी अरब से भारत लौट आए। उस समय बुशरा के सामने पढ़ाई के साथ परिवार और दो बच्चों की जिम्मेदारी भी थी।इसके बावजूद उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था, लेकिन बुशरा ने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की।
SDM से IPS तक का सफर

उनकी पोस्टिंग पश्चिम बंगाल में भी रही। यहां उन्होंने खड़गपुर के अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। अब प्रशासनिक फेरबदल के तहत उनकी नई तैनाती स्टेट आर्म्ड पुलिस की 4th बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के रूप में की गई है।

बुशरा बानो की कहानी का सबसे अहम पहलू उनका परिवार और करियर दोनों को साथ लेकर चलना रहा। दो बच्चों की जिम्मेदारी के बीच उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल की।
उनका सफर यह दिखाता है कि करियर में बदलाव का फैसला किसी भी उम्र या पारिवारिक परिस्थिति में लिया जा सकता है, बशर्ते लक्ष्य को लेकर तैयारी और निरंतरता बनी रहे।

