
प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर प्रियंका गांधी का हमला
प्रियंका गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री को इन मुद्दों का सामना करना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है। किसानों की बढ़ती बिजली दरों और अमेरिकी अदालत में अडानी समूह के खिलाफ आरोपों पर कोई जवाब नहीं आ रहा। सरकार हर दिन सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है। यह साफ है कि वे अडानी मुद्दे पर चर्चा से बचना चाहते हैं।”
उन्होंने संसद में सरकार की रणनीति को लेकर कहा कि सत्ता पक्ष खुद कार्यवाही बाधित कर रहा है। “जैसे ही विपक्ष संसद में मुद्दे उठाने की कोशिश करता है, सत्ता पक्ष बहस से बचने के लिए हंगामा खड़ा कर देता है। यह सरकार की असफलता का प्रतीक है।”
अडानी और बिजली दरों पर सवाल
प्रियंका गांधी ने अडानी समूह के खिलाफ अमेरिकी अदालत में लगे आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि अडानी समूह ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार कर जनता पर बढ़े हुए बिजली बिलों का बोझ डाला। उन्होंने कहा, “गांवों और किसानों के बीच बिजली की बढ़ती दरें बड़ा मुद्दा हैं, लेकिन सरकार इस पर चर्चा से बच रही है। क्या सरकार अडानी को बचाने के लिए जनता के सवालों से भाग रही है?”
राहुल गांधी का व्यंग्य और विपक्ष की रणनीति
प्रियंका गांधी के हमले के बीच राहुल गांधी ने भी व्यंग्यात्मक अंदाज में सरकार को घेरा। उन्होंने ‘मोदी-अडानी भाई-भाई’ के नारे को लेकर सवाल उठाए और संसद में अडानी मुद्दे पर चर्चा की मांग की। राहुल गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री की चुप्पी बताती है कि सरकार सवालों से बच रही है। जब तक जवाब नहीं मिलेगा, विपक्ष आवाज उठाता रहेगा।”

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर विपक्ष ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “राज्यसभा में एकतरफा कार्रवाई हो रही है। यह लोकतंत्र पर हमला है। विपक्ष के सवालों को लगातार दबाया जा रहा है।”
विपक्ष का कहना है कि राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही को सत्तारूढ़ दल द्वारा बाधित किया जा रहा है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा के सभापति धनखड़ दोनों का रवैया पक्षपाती है।
केंद्र सरकार का जवाब
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी संसद की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सभी सांसद चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी मुद्दों को उठाने के बजाय कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं।”
निष्कर्ष
संसद के भीतर जारी यह गतिरोध भारतीय लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसद में अनुपस्थिति और अडानी समूह से जुड़े सवालों पर सरकार की चुप्पी ने विपक्ष को मजबूत हथियार दे दिया है। जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रहा है।
इस स्थिति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार अडानी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार होती है या यह गतिरोध आगे भी जारी रहता है।
