
सरकार का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश और वर्तमान कानूनी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की मान्यता प्राप्त डिग्रियां केवल संबंधित कानूनों के तहत स्थापित और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय ही प्रदान कर सकते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा पूर्व की तरह जारी रहेगी। वहीं, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों को विश्वविद्यालयों या अन्य मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेना होगा।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राज्य की शिक्षा प्रणाली को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बनाया जाएगा और छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
